मुश्किल वक़्त हर किसी की ज़िंदगी में आता है। ये वक़्त दर्द देता है, पर साथ ही सिखाता है कि हम कितने मज़बूत हैं और कौन सच में अपना है। यहाँ मुश्किल वक़्त, सब्र और हौसले पर मौलिक शायरी है, ताकि याद रहे: ये दौर भी गुज़र जाएगा।

मुश्किल वक़्त शायरी 2 लाइन
मुश्किल वक़्त भी एक उस्ताद है,
जो सिखा दे, वो उम्र भर याद है।
बुरा वक़्त ठहरता नहीं जनाब,
बस सब्र का इम्तिहान लेता है।
अँधेरी रात कितनी भी लंबी हो,
सुबह को आने से कौन रोक सका है।
ये दौर भी गुज़र जाएगा, यक़ीन रख,
बस हिम्मत का दामन थामे रख।
टूटकर भी जो मुस्कुराना जानते हैं,
वही मुश्किल वक़्त को हराना जानते हैं।
बुरे वक़्त में अपनों की पहचान
मुश्किल वक़्त ने एक काम अच्छा किया,
अपनों और परायों का फ़र्क़ बता दिया।
अच्छे दिनों में भीड़ थी, बुरे में अकेले,
यही है ज़िंदगी के असली मेले।
जो बुरे वक़्त में साथ खड़ा रहा,
वही उम्र भर के लिए अपना रहा।
वक़्त बुरा था, लोग नहीं बदले,
बस उनके असली चेहरे सामने आए।
हौसला देने वाली शायरी
गिरे हो तो क्या, उठना अभी बाक़ी है,
हारे नहीं हो, बस लड़ना अभी बाक़ी है।
आज जो पत्थर रास्ते में पड़े हैं,
कल वही सीढ़ी बनकर खड़े होंगे।
मुश्किलें बताती हैं कि हम कितने ख़ास हैं,
आसान रास्तों पर तो सब चलते हैं।
वक़्त बदलेगा, ये वादा है ख़ुद से,
मेहनत करते रहेंगे पूरे जुनून से।
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