किसी इंसान का छोटा या बड़ा होना उसकी दौलत या जाति से नहीं, उसकी सोच और कर्मों से तय होता है। "नीच" वो है जिसकी नीयत गिरी हुई हो: जो धोखा दे, दूसरों को गिराए या कमज़ोर का फ़ायदा उठाए। यहाँ ऐसी सोच वालों की पहचान पर मौलिक शायरी है।

नीच लोगों पर शायरी
नीच वो नहीं जो ग़रीब है,
नीच वो है जिसकी नीयत ग़रीब है।
ऊँचे महलों में भी नीच सोच मिली,
झोपड़ी में भी बड़े दिल वाले मिले।
जो दूसरों को गिराकर ख़ुश होते हैं,
वो ख़ुद अंदर से कितने छोटे होते हैं।
नीच लोगों से उम्मीद क्या रखना,
उनसे बस दूरी अच्छी है।
इंसान की पहचान उसके कर्म से होती है,
नाम और दौलत तो बस मुखौटा है।
नीच आदमी की पहचान शायरी
जो एहसान भूल जाए, वो छोटा है,
जो एहसान जताए, वो और भी छोटा है।
कमज़ोर पर रौब दिखाए जो,
ताक़तवर के आगे झुक जाए जो।
मुसीबत में जो साथ छोड़ दे,
मौक़ा मिलते ही रिश्ता तोड़ दे।
जिसकी ज़ुबान पर दूसरों की बुराई हो,
समझ लो उसकी सोच में ही खाई हो।
नीच लोगों के लिए स्टेटस
हमने अपना स्तर नहीं गिराया,
इसलिए तुम्हें जवाब नहीं दिया।
गंदगी में पत्थर फेंकोगे तो छींटे तुम पर ही आएँगे।
कुछ लोगों को माफ़ कर दो,
उनकी सोच ही उनकी सज़ा है।
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