हर किसी की ज़िंदगी, उसके फ़ैसले और उसकी लड़ाइयाँ अपनी होती हैं। फिर भी कुछ लोग दूसरों के मामलों में बिन माँगी सलाह और टोका-टाकी करने से बाज़ नहीं आते। यहाँ दख़लअंदाज़ी, "लोग क्या कहेंगे" और अपनी ज़िंदगी अपने हिसाब से जीने पर मौलिक कोट्स और शायरी हैं।

दूसरों की ज़िंदगी में दख़ल पर कोट्स
अपनी ज़िंदगी सँवारने में इतना व्यस्त रहो कि दूसरों की ज़िंदगी में झाँकने का वक़्त ही न मिले।
हर किसी की कहानी के पीछे एक संघर्ष है, जो आपको दिखता नहीं। इसलिए फ़ैसला सुनाने से पहले रुकिए।
बिन माँगी सलाह और बिन बुलाया मेहमान, दोनों की क़द्र नहीं होती।
दूसरों के घर की खिड़की में झाँकने से अपना घर साफ़ नहीं होता।
दख़लअंदाज़ी पर शायरी
मेरी ज़िंदगी की किताब मैं ख़ुद लिखूँगा,
आप अपनी कहानी पर ध्यान दीजिए।
लोगों को फ़िक्र है मेरी हर बात की,
पर ख़बर नहीं मेरे किसी हालात की।
तुम्हें मेरे फ़ैसलों से ऐतराज़ क्यों है,
जब उनकी क़ीमत मैं ही चुकाता हूँ।
हर किसी के जूते में चलकर देखो,
फिर किसी की राह पर उँगली उठाओ।
लोग क्या कहेंगे पर कोट्स
लोग तो कुछ न कुछ कहेंगे, आप वो करिए जो सही है।
जो लोग आपकी ज़िंदगी नहीं जीते, उनकी राय से अपनी ज़िंदगी मत चलाइए।
सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग। इस रोग से आज़ाद होना ही असली आज़ादी है।
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