सबसे गहरा ज़ख़्म दुश्मन नहीं, अपने देते हैं, और वो भी पीठ पीछे। जिस पर भरोसा किया, उसी का धोखा दिल को लंबे समय तक चुभता है। यहाँ पीठ पीछे धोखे, बुराई और विश्वासघात पर मौलिक शायरी है जो उस दर्द को लफ़्ज़ देती है और आगे बढ़ने की हिम्मत भी।

पीठ पीछे धोखा शायरी
सामने से वार करते तो सह लेते,
पीठ पीछे के ज़ख़्म भरते नहीं।
जिसे ढाल समझा था अपनी,
उसी ने पीछे से ख़ंजर चला दिया।
धोखा देने वाले को पता नहीं,
उसने भरोसा तोड़ा है, दिल नहीं।
मुस्कुराकर गले मिलने वाले,
पीठ पीछे सबसे ज़्यादा बोलने वाले।
हमें दुश्मनों से कोई गिला नहीं,
शिकायत उनसे है जो अपने बनकर आए।
पीठ पीछे बुराई करने वालों पर शायरी
पीठ पीछे बोलने वाले पीछे ही रह जाते हैं,
हम आगे बढ़ जाते हैं, वो बातें बनाते हैं।
मेरी बुराई करने में जो वक़्त लगाते हो,
उतने में ख़ुद को बेहतर बना लेते।
तुम्हारी बातें मेरे क़दम नहीं रोक सकतीं,
पीठ पीछे की आवाज़ें आगे तक नहीं पहुँचतीं।
सामने आकर कहो तो इज़्ज़त करेंगे,
पीछे की बातों पर हम ध्यान नहीं देंगे।
विश्वासघात और भरोसे पर शायरी
भरोसा काँच की तरह होता है,
एक बार टूटे तो निशान रह जाता है।
अब हर किसी पर भरोसा नहीं करते,
एक धोखे ने बहुत कुछ सिखा दिया।
धोखा देकर तुमने हमें खोया है,
हमने तो बस एक सबक़ पाया है।
वक़्त सब दिखा देता है,
कौन अपना था, कौन बस नाम का।
इसी तरह की और शायरी
सभी सैड शायरी →
जिसकी माँ नहीं होती शायरी →
उदास मन शायरी →
अलविदा शायरी →
मरने वाली शायरी →
पति-पत्नी की दुख भरी शायरी →
भरोसा तोड़ने वाली शायरी →
ख़राब क़िस्मत शायरी →इस पेज की सभी शायरी Shayarifi टीम की मौलिक रचनाएँ हैं। निजी शेयरिंग के लिए बेझिझक इस्तेमाल करें।
