राजस्थान की बाईसा अपनी शान, स्वाभिमान और रंग-बिरंगी राजपूती पोशाक के लिए जानी जाती हैं। उनकी अदा में परंपरा भी है और आत्मविश्वास भी। यहाँ बाईसा के ठाठ, संस्कार और रॉयल अंदाज़ पर मौलिक शायरी और स्टेटस हैं, जो किसी का अपमान किए बिना अपनी विरासत पर गर्व करती हैं।

राजपूत बाईसा शायरी 2 लाइन
बाईसा की चाल में रजवाड़ी शान है,
आँखों में स्वाभिमान, दिल में मान है।
घूँघट की ओट में भी तेज़ छुपता नहीं,
बाईसा का रुतबा कभी झुकता नहीं।
सादगी में भी शाही ठाठ हैं,
बाईसा के हर अंदाज़ में बात है।
मीठी बोली, ऊँचे संस्कार,
यही है बाईसा का असली शृंगार।
रेत के धोरों-सी सुनहरी अदा,
बाईसा की शान रहे सदा।
रॉयल बाईसा एटीट्यूड शायरी
हम बाईसा हैं, नख़रे भी शाही रखते हैं,
पर दिल में सबके लिए जगह भी रखते हैं।
तलवार-सी तेज़ नज़र, फूलों-सा मन,
ऐसा है बाईसा का रॉयल पन।
इज़्ज़त की ख़ातिर सब कुछ वार दें,
बाईसा अपने उसूलों पर जान वार दें।
किसी से कम नहीं, किसी से ज़्यादा नहीं,
बाईसा का स्वाभिमान है, घमंड नहीं।
राजपूती पोशाक पर शायरी
राजपूती पोशाक और माथे पर बोरला,
बाईसा का रूप लगे चाँद से भी उजला।
लहरिये की चुनरी, हाथों में चूड़ा,
बाईसा का शृंगार है सबसे पूरा।
पोशाक की गोटा-किनारी चमकती है,
बाईसा की मुस्कान उससे भी दमकती है।
परंपरा पहनती हैं, गर्व से जीती हैं,
बाईसा अपनी जड़ों से जुड़ी रहती हैं।
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