दूसरों की ज़िंदगी में दख़ल न दें – कोट्स और शायरी हिंदी में

हर किसी की ज़िंदगी, उसके फ़ैसले और उसकी लड़ाइयाँ अपनी होती हैं। फिर भी कुछ लोग दूसरों के मामलों में बिन माँगी सलाह और टोका-टाकी करने से बाज़ नहीं आते। यहाँ दख़लअंदाज़ी, "लोग क्या कहेंगे" और अपनी ज़िंदगी अपने हिसाब से जीने पर मौलिक कोट्स और शायरी हैं।

दूसरों की ज़िंदगी में दख़ल न दें – Shayarifi चित्र
दूसरों की ज़िंदगी में दख़ल कोट्स – Shayarifi

दूसरों की ज़िंदगी में दख़ल पर कोट्स

#1

अपनी ज़िंदगी सँवारने में इतना व्यस्त रहो कि दूसरों की ज़िंदगी में झाँकने का वक़्त ही न मिले।

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#2

हर किसी की कहानी के पीछे एक संघर्ष है, जो आपको दिखता नहीं। इसलिए फ़ैसला सुनाने से पहले रुकिए।

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#3

बिन माँगी सलाह और बिन बुलाया मेहमान, दोनों की क़द्र नहीं होती।

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#4

दूसरों के घर की खिड़की में झाँकने से अपना घर साफ़ नहीं होता।

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दख़लअंदाज़ी पर शायरी

#5

मेरी ज़िंदगी की किताब मैं ख़ुद लिखूँगा,
आप अपनी कहानी पर ध्यान दीजिए।

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#6

लोगों को फ़िक्र है मेरी हर बात की,
पर ख़बर नहीं मेरे किसी हालात की।

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#7

तुम्हें मेरे फ़ैसलों से ऐतराज़ क्यों है,
जब उनकी क़ीमत मैं ही चुकाता हूँ।

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#8

हर किसी के जूते में चलकर देखो,
फिर किसी की राह पर उँगली उठाओ।

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लोग क्या कहेंगे पर कोट्स

#9

लोग तो कुछ न कुछ कहेंगे, आप वो करिए जो सही है।

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#10

जो लोग आपकी ज़िंदगी नहीं जीते, उनकी राय से अपनी ज़िंदगी मत चलाइए।

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#11

सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग। इस रोग से आज़ाद होना ही असली आज़ादी है।

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