कुछ लोग इतने मतलबी होते हैं कि रिश्ते, दोस्ती और भरोसा, सब उनके लिए सौदा बन जाता है। उनकी असलियत सामने आए तो दिल को चोट लगती है, पर सबक़ भी मिलता है। यहाँ मतलबी, झूठे और चालाक लोगों पर मौलिक शायरी है जो कड़वा सच बोलती है, गाली नहीं।

मतलबी घटिया लोगों पर शायरी
घटिया सोच वालों से क्या गिला करें,
उनका स्तर ही इतना है, हम क्या करें।
मतलब निकला तो पहचान भी भूल गए,
कल तक जो हमारे नाम की क़समें खाते थे।
इंसान की क़ीमत वो क्या समझेंगे,
जिनके लिए हर रिश्ता बस एक मौक़ा है।
जिनकी फ़ितरत में ही छल हो,
उनसे वफ़ा की उम्मीद बेकार है।
घटिया लोगों से बहस मत करना,
वो तुम्हें भी अपने स्तर पर ले आएँगे।
झूठे लोग शायरी
झूठ की बुनियाद पर महल नहीं टिकते,
झूठे लोग किसी के दिल में नहीं टिकते।
झूठे वादों का बोझ उठाते रहे,
हम सच समझकर निभाते रहे।
इतना झूठ बोला कि ख़ुद ही भूल गए,
कौन-सी बात सच थी, कौन-सी बनाई।
झूठे लोगों की मीठी बातें,
शहद में लिपटी ज़हर की सौग़ातें।
चालाक और बेशर्म लोगों पर स्टेटस
चालाक लोग सोचते हैं सबको बेवक़ूफ़ बना दिया,
पर वक़्त सबको आईना दिखा देता है।
बेशर्मी की हद देखी है हमने,
ग़लती करके भी जो आँख मिलाते हैं।
अब दूरी बना ली है ऐसे लोगों से,
सुकून की क़ीमत पर कोई रिश्ता नहीं।
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