माँ के बिना घर, घर नहीं लगता। जिन्होंने माँ को खोया है, वही जानते हैं कि उसकी कमी हर त्योहार, हर बीमारी और हर ख़ुशी में कैसे महसूस होती है। ये मौलिक शायरी उन सभी के लिए है जो अपनी माँ को याद करते हैं, ताकि वो जान सकें कि उनका दर्द समझा जाता है।

जिसकी माँ नहीं होती शायरी
जिसकी माँ नहीं होती, उससे पूछो,
रोटी में वो स्वाद क्यों नहीं होता।
दुनिया की हर भीड़ में अकेला लगता है,
माँ के बिना हर रिश्ता अधूरा लगता है।
बीमार पड़ूँ तो कोई माथा नहीं छूता,
माँ गई तो जैसे सब कुछ छूटा।
जिनके सिर पर माँ का हाथ नहीं होता,
उनका हर दिन आसान नहीं होता।
माँ के बिना त्योहार भी सूने लगते हैं,
दीये जलते हैं, पर अँधेरे लगते हैं।
माँ की याद में शायरी
आज भी तेरी आवाज़ ढूँढता हूँ माँ,
हर पुकार में तेरा नाम लेता हूँ माँ।
तेरी तस्वीर से बातें करता हूँ,
तू सुन रही है, ये यक़ीन रखता हूँ।
तू चली गई, पर दुआ छोड़ गई,
मेरे हर क़दम पर अपना साया छोड़ गई।
माँ, तेरी कमी कोई पूरी नहीं कर सकता,
तेरी जगह ये दिल किसी को नहीं दे सकता।
माँ की क़द्र पर स्टेटस
जिनकी माँ है, वो उसकी क़द्र करें,
ये दौलत दोबारा नहीं मिलती।
माँ के पास बैठो, बातें करो,
एक दिन ये पल सबसे क़ीमती लगेंगे।
दुनिया की हर दौलत दे दूँ,
बस एक बार फिर माँ की गोद मिल जाए।
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